सिविल लाइन स्थित होटल में प्रेसवार्ता कर आजाद समाज पार्टी नेता ने ट्रस्ट और CEO चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अयोध्या। सिविल लाइन स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए आजाद समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं मिल्कीपुर के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सूरज चौधरी ने राम मंदिर ट्रस्ट और हाल ही में की गई CEO की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए मंदिर की व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया में सभी समाजों की समान भागीदारी होनी चाहिए।

सूरज चौधरी ने कहा कि राम मंदिर की सुरक्षा और व्यवस्थाओं में पुलिस, राजस्व विभाग समेत तमाम सरकारी इकाइयां लगातार अपनी सेवाएं दे रही हैं। इन व्यवस्थाओं पर जनता के टैक्स का पैसा खर्च होता है। ऐसे में मंदिर से जुड़े आर्थिक लाभ, ठेके, महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और निर्णय लेने वाले पद यदि कुछ सीमित वर्गों तक सिमट जाते हैं तो यह गंभीर सवाल है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या को विश्व की धार्मिक राजधानी बनाने का सपना दिखाया गया। विकास के नाम पर लोगों के मकान तोड़े गए, किसानों और स्थानीय नागरिकों की जमीन ली गई तथा छोटे व्यापारियों और स्थानीय लोगों को विस्थापन की पीड़ा झेलनी पड़ी। इसके बावजूद मंदिर से पैदा होने वाले आर्थिक अवसरों और प्रशासनिक भागीदारी में स्थानीय लोगों को पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं मिल रही है।
राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी प्रकरण का जिक्र करते हुए सूरज चौधरी ने कहा कि इस मामले से अयोध्या की छवि देशभर में प्रभावित हुई है। इसका असर स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों, रिक्शा चालकों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच के बजाय एक व्यक्ति और उसके समाज को केंद्र में रखकर माहौल बनाने का प्रयास किया गया।

सूरज चौधरी ने राम मंदिर ट्रस्ट और CEO चयन समिति में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि चयन समिति में किसी एक समाज का वर्चस्व है और शॉर्टलिस्ट किए गए नामों में भी उसी वर्ग का प्रभाव दिखाई देता है, तो यह केवल नियुक्ति का मामला नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व का प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि “राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर सबका है तो उसकी व्यवस्था में भागीदारी भी सबकी होनी चाहिए। मंदिर किसी एक जाति, वर्ग या चुनिंदा लोगों की जागीर नहीं बन सकता।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि CEO समेत महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। चयन समिति में समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जाए और खुली आवेदन एवं इंटरव्यू प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्तियां की जाएं।
सूरज चौधरी ने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही, सामाजिक प्रतिनिधित्व और अयोध्या के स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की है।




