खबर हरिद्वार से हैं जहां आपको बताते चले की वैसे तो आँचल का नाम आते ही. माँ की यादें ताज़ा हो जाती हैँ,, माँ के स्नेह और ममता की कहानी ही आंचल के साथ शुरू होती है,, शायद इसलिए दूध के व्यापार से जुड़े संस्थान ने आँचल डेयरी का नाम दिया लेकिन वहीं दूसरी ओर इस नाम पर तब सवाल उठने लगे जब इसकी आड़ लेकर लोग बीड़ी, सिगरेट, गुटका आदि की बिक्री करने लगे,, हालांकि ये व्यवसाय मानवता के लिए कलंक तो साबित होता ही है साथ ही आँचल डेयरी जैसे पवित्र नाम पर बदनुमा दाग़ भी साबित होता है,,

यह मामला सिर्फ मुख्यालय के कुछ है दूरी विकास भवन के पास रोशनाबाद में बेखौफ़ चल रहा है,, अब देखना यह है कि क्या प्रसाशन इस तरह के अवैध व्यवसाय पर लगाम लगाने मे कामयाब होगा,, या फिर यू हीं चलता रहेगा यह व्यापार, इतना ही नहीं आपको बता दे की आंचल डेरी चलने वाले संचालक ने ऑडियो कॉल के जरिए बताया कि आंचल डेरी पर दूध बेचकर आंचल डेरी वाले को ₹5000 की धनराशि देने में असमर्थ है

इसलिए आंचल डेरी पर बैठे संचालक ने बिरी गुटका सिगरेट बेचने पर है मजबूर ऐसे में सवाल उठता है कि आँचल डेरी पर बैठे संचालक द्वारा किसे दिया जाता है ₹5000 धन राशि,,,,,



