नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था की रीढ़ ट्रांसपोर्ट सेक्टर का सबसे खराब दौर, मिलावटी तेल से अस्तित्व पर संकट…
नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था की रीढ़ ट्रांसपोर्ट सेक्टर का सबसे खराब दौर, मिलावटी तेल से अस्तित्व पर संकट...

नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था की रीढ़ ट्रांसपोर्ट सेक्टर का सबसे खराब दौर, मिलावटी तेल से अस्तित्व पर संकट…
पिछले 10_12 सालों में देश में बड़े उतार चढ़ाव देखे गए, नोट बंदी देशबंदी 28% जीएसटी ने अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर प्रहार किया…
जिसने देश के करोड़ों लघु मध्यम उद्योगों की कमर तोड़ कर रख दी, कई करोड़ लोगों की रोजी रोटी का सहारा छीन लिया।
एकाएक आए इस सैलाबी बदलाव से पहले से परेशान आम आदमी एक निरीह प्राणी हो गया।
देश की अर्थव्यवस्था की आक्सीजन माने जाने वाला ट्रांसपोर्ट सेक्टर जो कई करोड़ लोगों की रोजी रोटी का सहारा है।
वह भी इन बदलावों की जद में सीधे तौर पर आ गया।

मार्केट से माल लोड कर अपने गंतव्य तक जाने वाले मोटर वाहनों को रास्ते में महंगे टोल जगह जगह आरटीओ पुलिस के झंझावतों को झेलते हुए अपना सफर तय करते हुए लक्ष्य तक पहुंचना था।
गिरते भाड़े अंधाधुंध टोल टैक्स समेत अन्य कागजी कोरम के झंझावतों में दबे मोटर मालिकों की स्थिति को बेहद दयनीय स्थिति में पहुंचा दिया।
ऐसे में अब ट्रांसपोर्ट सेक्टर भी अब फायदे का सेक्टर नही रह गया। हताश निराश मोटर मालिकों को कहीं से कोई राहत भी नहीं मिलती नजर आ रही है।
अर्थ व्यवस्था की रीढ़ और करोड़ों लोगों के प्रत्यक्ष रोजगार के इस सेक्टर को सरकार हाशिए पर रखे हुए है।
ऊपर से मिलावटी तेल से अब इसके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग के फैसले को सरकार को फिर से देखना होगा।

